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Wednesday, May 27, 2009

cosmic voice


कहाँ इधर उधर भटक रहे हो?
किन मकड़ - जालों में अटक रहे हो?
किन प्रश्नों में उलझे हुवे हो?
किन उत्तरों की है तुम्हें तलाश?
किन अमृत बूंदों के लिये है तुम्हारी प्यास?
है वोह कौन सी मंजिल ?
जिसे तुम ढूंढ रहे हो?
गर्दिश की किन राहों में खोये हो?

अपनी आप से क्यों दूर हो गये हो?
साब कुछ है तुम्हारे ही पास..
फिर किस लिये है ये बेकरारी
किस लिये हो तुम उदास?..
मैं हूँ तुम्हारे ही पास..
आओ बैठो मेरे पास..
आओ बैठो मेरे पास...

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